महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी, जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा.. Ma…
Read moreवो ना ही मिलते तो अच्छा था..., बेकार में मोहब्बत से नफरत हो गयी..!! Wo na hi mi…
Read moreAhmad Faraz- http://en.wikipedia.org/wiki/Ahmad_Faraz कौन परेशान होता है तेरे …
Read moreवह समझता है शराफ़त को ऊन का कुर्ता,., जब कड़ी धूप हो उसको उतार आता है,.,!!! Wah…
Read moreये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले, उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंन…
Read moreलोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्…
Read moreवक्त-बेवक्त तेरी यादों का सैलाब तौबा, बहा ले जाता है, सुकूं मेरी तन्हा रातों क…
Read moreअपने होने का हम इस तरह पता देते थे खाक मुट्ठी में उठाते थे, उड़ा देते थे बेसमर …
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