महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी, जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा.. Ma…
Read moreवो ना ही मिलते तो अच्छा था..., बेकार में मोहब्बत से नफरत हो गयी..!! Wo na hi mi…
Read moreवह समझता है शराफ़त को ऊन का कुर्ता,., जब कड़ी धूप हो उसको उतार आता है,.,!!! Wah…
Read moreबैठता हूँ लिखने शिद्दत -ए -दिल से .,.पर खयाल -ए -मोहब्बत कलम रोक देता है .,.,!!…
Read more