महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी, जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा.. Ma…
Read moreवो ना ही मिलते तो अच्छा था..., बेकार में मोहब्बत से नफरत हो गयी..!! Wo na hi mi…
Read moreवह समझता है शराफ़त को ऊन का कुर्ता,., जब कड़ी धूप हो उसको उतार आता है,.,!!! Wah…
Read moreपहली मुलाकात थी और हम दोनों ही थे बस .,., वो जुल्फें न संभाल पाए , और हम खुद को…
Read moreओ कल्पवृक्ष की सोनजुही ! ओ अमलतास की अमलकली! धरती के आतप से जलते.. मन पर छाई…
Read moreEnjoy Winter.....! "धूंप भी खुल के कुछ नहीं कहती , रात ढलती नहीं थम जात…
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