अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे तरक़्क़ी क…
किसी ने जहर कहा है किसी ने शहद कहा कोई समझ नहीं पाता है जायका मेरा मैं चाहता था…